राजा बलि के दरबार मची रे होली रे राजा बलि के...
के मण✩ लाल गुलाल उड़त है? (कितने मण लाल गुलाल उड़ रहा है ?) ✩एक मण=40किलोग्राम
के मण केसर कस्तूरी रे राजा ....? ( कितने मण केसर कस्तूरी ?)
सौ मण लाल गुलाल उड़त है (सौ मण लाल गुलाल उड़ रहा है)
दस मण केसर कस्तूरी रे राजा...... (दस मण केसर कस्तूरी रे)
कितारे बरस को ओ कंवर कानुड़ो रे (कितने वर्ष का ये कुमार कान्हा?)
कितरा बरस की है राधा गोरी रे राजा .... (कितने वर्ष की राधा गौरी)
बीस बरस को म्हारो कंवर कानुड़ो रे
तेरह बरस की है राधा गोरी रे राजा ......
कुणा जी के हाथ में है रंग गो कटोरों रे (किनके हाथ में है रंग का कटोरा)
कुणा जी रे हाथ में है पिचकारी रे राजा ....(किनके हाथ में है पिचकारी)
राधा जी रे हाथ में रंग को कटोरों रे (राधा जी के हाथ में रंग का कटोरा)
कानुड़ रे हाथ में पिचकारी रे राजा ....( कान्हा के हाथ में पिचकारी)
भर पिचकारी कानू राधा उपर मारी रे (भर पिचकारी कान्हा ने राधा ऊपर मारी रे)
है रंग से भिगोड़ो आंगणयो रे ... राजा ...(है रंग से भीगा आंगन रे )
चालो देखण न बाई-सा थारो बीरो नाचे रे चालो देखण न (चलो देखने बाई-सा/ननंद आपका भाई नाच रहे हैं )
बीरो नाचे रे क थारो भाई नाचे रे चालो देखण ने
आ रसियाँ की टोली देखो ढोलक चंग बजावे रे (ये रसियों की टोली देखो ढोलक- चंग बजा रही )
घूमर घाले सायबो यो लुळ लुळ नाचे रे, चालो... (घूमर/नृत्य कर है शौहर झुक झुक के)
बण कर बींद सेवरो बांदयो रंग म भरया बराती रे ( बन कर दूल्हा सेवरा बाँधा, रंग में भरे बराती रे)
मुछ्यां आळी बींदणी क सागे नाच रे, चलो.... (मूछों वाली दुल्हन के साथ नाचे रे 😆)
चार तो चंगां की जोड़याँ बाज़ारां म बाजे र (चार डफ की जोड़ी बाजार म बज रही है )
गोखां बैठी गौरणियां घुंघट स झाँक रे, चालो... (ऊँची जगह पर बैठी गौरियाँ घूंघट से झांक रही है)
चार तो चंगां की जोड़याँ बागाँ माय बाजे र (चार डफ की जोड़ी बांगों में बज रही है)
फूलड़ा चुगती छोरियाँ चंगां पर नाचे रे ( फूल चुगती हुई लड़कियां चंग/डफ पर नाच रही है )
चालो देखण न बाईसा थारो बीरो नाचे रे चालो देखण न
बीरो नाचे रे क थारो भाई नाचे रे चालो देखण ने
पहलो तो रंग म्हारा सुसरो जी न्यारा
लाड लड़ाया म्हाने बाबुल का रे, पचरंग फागणियो
दुसरो तो रंग म्हारा सासु जी प्यारा याद भुलाई म्हारी मायड़ की रे
तीजो तो रंग म्हारो देवर प्यारो
काजळीयो रे म्हारी आंख्यां को रे
चौथो तो रंग म्हारी ननंदल प्यारी
कोयलड़ी रे म्हारे बागां की रे, पचरंग फागणियो...
पाँचवों तो रंग म्हारा छैल भंवर जी प्यारा
हिवड़ लगाई म्हाने रंग रसियो रे, पचरंग फागणियो
थोड़ी थोड़ी लुळ ज्या म्हारे कड्यां क लिपट ज्या
म्हारे बादिल भंवर की पाळयोड़ी कमोडण थोड़ी नीची लुळ ज्या ए
पांच तेरी नथली पचीस तेरो टेवटियो
कोई पैहर बाण नाचबा न आज्या ऐ कमोडण, थोड़ी नीची लुळ जाय..
पांच तेरी चुनड़ी पचीस तेरी कुर्ती
कोई पैहर बाण नाचबा न आज्या ऐ कमोडण, थोड़ी नीची लुळ जाय..
हथेळयाँ पर तन चुगो ऐ चुगा द्यूं
कोई नकल्या पाणी पा द्यूं ऐ कमोडण
म्हारे बादिल भंवर की पाळयोड़ी कमोडण थोड़ी नीची लुळ ज्या ए
कोई पांच तेर टवटीयो,पचीस तेरी पायल
कोई पैहर बाण नाचबा न आज्या ऐ कमोडण, थोड़ी नीची लुळ जाय..
म्हारे बादिल भंवर की पाळयोड़ी कमोडण थोड़ी नीची लुळ ज्या ए
घूंघट खोल दे भायां की ऐ भावज हियो बिलख रे घूंघट खोल दे
हियो बिलख रे हियो बिलख घूंघट खोल दे
चाँद क चाँदनीय गौरी की रखड़ी घड़ीज रे
बिजली के चाँदने बालमियों निरखे रे तन घूंघट खोल दे
चाँद क चाँदनीय गौरी की नथली घड़ीज ओ
चाँद के चाँदनीय गौरी की पायलड़ी घड़ीज ओ
बिजली के चाँदने बालमियों निरखे रे तन घूंघट खोल दे
घूंघट खोल दे भायां की ऐ भावज हियो बिलख रे घूंघट खोल दे
राजस्थान के अनोखे लोकगीत धमाल के बारे में आज पहली बार पढ़ा और सुना, होली के रंगों की मस्ती और धमाल से भरा नृत्य और संगीत वाकई बेहद अनुपम है
ReplyDeleteहोली के अवसर पर सारे,
ReplyDeleteरंगों को मैं ले आऊँ,
और तुम्हारे जीवन में मैं,
उन रंगों को बिखराऊँ...
रंगोत्सव की शुभकामनाएं
–वाह! बहुत सुन्दर
ReplyDeleteशुभकामनाओं के संग बधाई
प्रिय रोहित,अपनी संस्कृति की अद्भूत छटा बिखेरता ये सचित्र लेख सच में मन को अद्भूत आनन्द से भर गया।असल में होली गीतों के रूप में चारों दिशाओं में नारी मन की व्यथा गाई गई है ।वर्जित विषय भी रसीले कथ्य के रूप में गीतों में ढल जाते हैं।तुम्हारे द्वारा संकलित गीत जस के तस तो समझ नहीं पाई पर भाव जरुर हृदय को छू गये।सभी वीडियो में अलबेला संगीत लाजवाबहै। हम लोग बहुत भाग्यशाली हैं जिन्होनें इस प्रकार के उत्सवी उपक्रम देखें है।अगली पीढ़ी के लिए इस तरह के रीति-रिवाज़ थाती रूप में सहेजने जरुरी हैं।श्रम साध्य प्रस्तुति के लिए सस्नेह बधाई।होली की सपरिवार हार्दिक शुभकामनायें और होली की हार्दिक शुभकामनाएं और और बधाई।
ReplyDeleteबहुत सुंदर
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